इतना करना की जुदाई न रहे

किसी को प्यार इतना देना की
हद न रहे पर ऐतबार भी इतना करना की
शक न रहे वफ़ा इतना करना की बेवफाई न रहे
और दुवा इतना करना की जुदाई न रहे.

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