चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 50

246 : - आलसी राजा की प्रशंसा उसके सेवक भी नहीं करते।
247 : - शक्तिशाली राजा लाभ को प्राप्त करने का प्रयत्न करता है।
248 : - राज्यतंत्र को ही नीतिशास्त्र कहते है।
249 : - राज्यतंत्र से संबंधित घरेलु और बाह्य, दोनों कर्तव्यों को राजतंत्र का अंग कहा जाता है।
250 : - राज्य नीति का संबंध केवल अपने राज्य को सम्रद्धि प्रदान करने वाले मामलो से होता है।

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