चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 48

236 : - भविष्य के अन्धकार में छिपे कार्य के लिए श्रेष्ठ मंत्रणा दीपक के समान प्रकाश देने वाली है।

237 : - मंत्रणा के समय कर्त्तव्य पालन में कभी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए।

238 : - मंत्रणा रूप आँखों से शत्रु के छिद्रों अर्थात उसकी कमजोरियों को देखा-परखा जाता है।

239 : - राजा, गुप्तचर और मंत्री तीनो का एक मत होना किसी भी मंत्रणा की सफलता है।

240 : - कार्य-अकार्य के तत्वदर्शी ही मंत्री होने चाहिए।

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