चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 47

231 : - विचार अथवा मंत्रणा को गुप्त न रखने पर कार्य नष्ट हो जाता है।

232 : - लापरवाही अथवा आलस्य से भेद खुल जाता है।

233 : - सभी मार्गों से मंत्रणा की रक्षा करनी चाहिए।

234 : - मन्त्रणा की सम्पति से ही राज्य का विकास होता है।

235 : - मंत्रणा की गोपनीयता को सर्वोत्तम माना गया है।

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