चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 44

216 : - जहां लक्ष्मी (धन) का निवास होता है, वहां सहज ही सुख-सम्पदा आ जुड़ती है।

217 : - इन्द्रियों पर विजय का आधार विनर्मता है।

218 : - प्रकर्ति का कोप सभी कोपों से बड़ा होता है।

219 : - शासक को स्वयं योगय बनकर योगय प्रशासकों की सहायता से शासन करना चाहिए।

220 : - योग्य सहायकों के बिना निर्णय करना बड़ा कठिन होता है।

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