चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 40

196 : - जिसकी आत्मा संयमित होती है, वही आत्मविजयी होता है।

197 : - स्वभाव का अतिक्रमण अत्यंत कठिन है।

198 : - धूर्त व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए दूसरों की सेवा करते हैं।

199 : - कल की हज़ार कौड़ियों से आज की एक कौड़ी भली। अर्थात संतोष सबसे बड़ा धन है।

200 : - दुष्ट स्त्री बुद्धिमान व्यक्ति के शरीर को भी निर्बल बना देती है।

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