चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 37

181 : - दोषहीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है।

182 : - किसी भी कार्य में पल भर का भी विलम्ब न करें।

183 : - चंचल चित वाले के कार्य कभी समाप्त नहीं होते।

184 : - पहले निश्चय करिएँ, फिर कार्य आरम्भ करें।

185 : - भाग्य पुरुषार्थी के पीछे चलता है।

Also, Read
Swami Vivekananda
Good Morning
Chanakya Niti

chanakya thoughts success

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *