चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 36

176 : - सोने के साथ मिलकर चांदी भी सोने जैसी दिखाई पड़ती है अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवश्य पड़ता है।

177 : - ढेकुली नीचे सिर झुकाकर ही कुँए से जल निकालती है। अर्थात कपटी या पापी व्यक्ति सदैव मधुर वचन बोलकर अपना काम निकालते है। 

178 : - सत्य भी यदि अनुचित है तो उसे नहीं कहना चाहिए।

179 : - समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में निर्विघ्न नहीं रहता।

180 : - जो जिस कार्ये में कुशल हो उसे उसी कार्ये में लगना चाहिए।

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