चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 35

171 : - शत्रु के गुण को भी ग्रहण करना चाहिए।

172 : - अपने स्थान पर बने रहने से ही मनुष्य पूजा जाता है।

173 : - सभी प्रकार के भय से बदनामी का भय सबसे बड़ा होता है।

174 : - किसी लक्ष्य की सिद्धि में कभी शत्रु का साथ न करें।

175 : - आलसी का न वर्तमान होता है, न भविष्य।

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