चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 34

166 : - आग सिर में स्थापित करने पर भी जलाती है। अर्थात दुष्ट व्यक्ति का कितना भी सम्मान कर लें, वह सदा दुःख ही देता है।

167 : - अन्न के सिवाय कोई दूसरा धन नहीं है।

168 : - भूख के समान कोई दूसरा शत्रु नहीं है।

169 : - विद्या ही निर्धन का धन है।

170 : - विद्या को चोर भी नहीं चुरा सकता।

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