चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 31

152 : - वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते है।
153 : - शत्रु की दुर्बलता जानने तक उसे अपना मित्र बनाए रखें।
154 : - सिंह भूखा होने पर भी तिनका नहीं खाता। 
155 : - एक ही देश के दो शत्रु परस्पर मित्र होते है।

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