क्रोध के बारे में चाणक्य क्या कहते हैं || चाणक्य नीति chanakya niti || भाग 106

Chaanaky Ke Anamol Vichaar

526 : - पुत्र को पिता के अनुकूल आचरण करना चाहिए।
526 : - putr ko pita ke anukool aacharan karana chaahie.
527 : - अत्यधिक आदर-सत्कार से शंका उत्पन्न हो जाती है।
527 : - atyadhik aadar-satkaar se shanka utpann ho jaatee hai.
528 : - स्वामी के क्रोधित होने पर स्वामी के अनुरूप ही काम करें।
528 : - svaamee ke krodhit hone par svaamee ke anuroop hee kaam karen.
529 : - माता द्वारा प्रताड़ित बालक माता के पास जाकर ही रोता है।
529 : - maata dvaara prataadit baalak maata ke paas jaakar hee rota hai.
530 : - स्नेह करने वालों का रोष अल्प समय के लिए होता है।
530 : - sneh karane vaalon ka rosh alp samay ke lie hota hai.
525 : - शिष्य को गुरु के वश में होकर कार्य करना चाहिए।
525 : - shishy ko guru ke vash mein hokar kaary karana chaahie.

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