चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 55

271 : - ईर्ष्या करने वाले दो समान व्यक्तियों में विरोध पैदा कर देना चाहिए।
272 : - चतुरंगणी सेना (हाथी, घोड़े, रथ और पैदल) होने पर भी इन्द्रियों के वश में रहने वाला राजा नष्ट हो जाता है।
273 : - जुए में लिप्त रहने वाले के कार्य पूरे नहीं होते है।
274 : - शिकारपरस्त राजा धर्म और अर्थ दोनों को नष्ट कर लेता है।
275 : - शराबी व्यक्ति का कोई कार्य पूरा नहीं होता है।

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