चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 53

261 : - बलवान से युद्ध करना हाथियों से पैदल सेना को लड़ाने के समान है।
262 : - कच्चा पात्र कच्चे पात्र से टकराकर टूट जाता है।
263 : - संधि और एकता होने पर भी सतर्क रहे।
264 : - शत्रुओं से अपने राज्य की पूर्ण रक्षा करें।
265 : - शक्तिहीन को बलवान का आश्रय लेना चाहिए।

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