चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 51

251 : - निर्बल राजा को तत्काल संधि करनी चाहिए।
252 : - पडोसी राज्यों से सन्धियां तथा पारस्परिक व्यवहार का आदान-प्रदान और संबंध विच्छेद आदि का निर्वाह मंत्रिमंडल करता है।
253 : - राज्य को नीतिशास्त्र के अनुसार चलना चाहिए।
254 : - निकट के राज्य स्वभाव से शत्रु हो जाते है।
255 : - किसी विशेष प्रयोजन के लिए ही शत्रु मित्र बनता है।

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