चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 41

201 : - आग में आग नहीं डालनी चाहिए। अर्थात क्रोधी व्यक्ति को अधिक क्रोध नहीं दिलाना चाहिए।

202 : - मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है।

203 : - दुष्ट की मित्रता से शत्रु की मित्रता अच्छी होती है।

204 : - दूध के लिए हथिनी पालने की जरुरत नहीं होती। अर्थात आवश्कयता के अनुसार साधन जुटाने चाहिए।

205 : - कठिन समय के लिए धन की रक्षा करनी चाहिए।

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