चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 33

161 : - यदि माता दुष्ट है तो उसे भी त्याग देना चाहिए।

162 : - यदि स्वयं के हाथ में विष फ़ैल रहा है तो उसे काट देना चाहिए।

163 : - सांप को दूध पिलाने से विष ही बढ़ता है, न की अमृत।

164 : - एक बिगड़ैल गाय सौ कुत्तों से ज्यादा श्रेष्ठ है। अर्थात एक विपरीत स्वाभाव का परम हितैषी व्यक्ति, उन सौ लोगों से श्रेष्ठ है जो आपकी चापलूसी करते है।

165 : - कल के मोर से आज का कबूतर भला। अर्थात संतोष सब बड़ा धन है।

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